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आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। काम हो या पढ़ाई, मनोरंजन हो या सोशल मीडिया – हर जगह स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन जब यही आदत लत (Addiction) में बदल जाती है, तो यह मानसिक, शारीरिक और सामाजिक जीवन पर बुरा असर डालने लगती है।
भारत में स्थिति:
अच्छी खबर यह है कि सही नुस्खे, जागरूकता और पेशेवर मदद से स्क्रीन एडिक्शन पर काबू पाया जा सकता है।
अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो यह स्क्रीन एडिक्शन का संकेत हो सकता है।
1. स्क्रीन टाइम लिमिट तय करें
मोबाइल में डिजिटल वेलनेस ऐप या स्क्रीन टाइम कंट्रोल फीचर्स का इस्तेमाल करें। दिन में अधिकतम 1-2 घंटे का समय सोशल मीडिया या मनोरंजन के लिए रखें।
2. नो-स्क्रीन ज़ोन बनाएँ
घर में कुछ जगह जैसे डाइनिंग एरिया और बेडरूम को नो-स्क्रीन ज़ोन बना दें। इससे आदत धीरे-धीरे कम होगी।
3. ऑफलाइन शौक अपनाएँ
पढ़ाई, खेल, संगीत, योग, ध्यान, पेंटिंग या किताबें पढ़ने जैसी गतिविधियाँ स्क्रीन टाइम कम करने में मदद करती हैं।
4. डिजिटल डिटॉक्स डे रखें
सप्ताह में एक दिन नो-स्क्रीन डे रखें। परिवार के साथ समय बिताएँ, बाहर घूमने जाएँ या कोई रचनात्मक काम करें।
5. पेशेवर मदद लें
कई बार स्क्रीन की लत इतनी गहरी हो जाती है कि पेशेवर काउंसलिंग और रिहैब सेंटर की जरूरत पड़ती है। यहीं पर Veda Rehabilitation & Wellness मदद करता है।
Veda Rehabilitation & Wellness भारत के प्रमुख लक्जरी रिहैब सेंटर में से एक है जो स्क्रीन एडिक्शन और डिजिटल लत के लिए आधुनिक और गोपनीय इलाज प्रदान करता है।
Veda में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख थेरेपी:
Veda में इलाज के दौरान मरीज को मिलता है:
मुंबई, दिल्ली और बैंगलोर में स्थित Veda मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति के क्षेत्र में भारत का अग्रणी नाम है।
उत्तर: जब व्यक्ति का डिजिटल उपकरणों पर इतना अधिक समय बिताना आदत में बदल जाए कि वह पढ़ाई, काम, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगे, तो इसे स्क्रीन एडिक्शन कहते हैं।
उत्तर: आमतौर पर 30-60 दिन का प्रोग्राम होता है, लेकिन यह व्यक्ति की आदतों और मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है।
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक स्क्रीन की लत डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी और नींद की समस्याओं में बदल सकती है।
उत्तर: हाँ, Veda में 100% गोपनीयता के साथ इलाज किया जाता है, खासकर हाई-प्रोफाइल और सेलिब्रिटी क्लाइंट्स के लिए।
उत्तर: CBT, DBT, फैमिली थेरेपी, योग, ध्यान, आर्ट और म्यूजिक थेरेपी स्क्रीन एडिक्शन से छुटकारा पाने के लिए दी जाती हैं।
